Pratha | प्रथा
Sarita commits suicide with her infant daughter. She jumps from the top floor of a multistory building in Mumbai. People in the colony tell the police that she was working as a full-time maid in a house there, and when the police question her employers, they do not find anything suspicious against them. As the investigation progresses, the police learn about her village, and when they question Sarita’s family about her and her husband Chandar, the family tells the police that they have had no relationship with Sarita for a long time.
सरिता नाम की एक काम वाली जिस घर में काम करती है उस मकान की आखिरी मंजिल से अपनी नवजात बच्ची के साथ कूद कर जान दे देती है। पुलिस को उसके मालिकों के रवैये से कोई शक नहीं पैदा होता है मगर पुलिस मामले की तह तक जाना चाहती हैं। पता चलता है की सरिता के पति का नाम चन्दर है और वो लोग शोलापुर के रहने वाले हैं। पुलिस ये भी पता लगाती है की चन्दर कुछ ही दिन पहले एक लड़की को लेकर मुंबई आया था और उसके साथ एक लॉज में रुका था। पुलिस उस लॉज की सीसीटीवी फुटेज निकलवा कर लड़की और चन्दर को तलाशना शुरू करती है। तलाश करते करते पुलिस को सरिता के गाँव का पता चलता है। वहां पहुचने पर पुलिस को सरिता का परिवार भी मिल जाता है जिसमे उसका पिता, भाई और माँ रहते हैं। जब पुलिस उनको बताती है की सरिता की मृत्यु हो चुकी है और चन्दर गायब है तो उनलोगो को कोई आश्चर्य नहीं होता है और वो लोग बताते हैं की उनलोगों ने सरिता से नाता तोड़ रखा है और उन्हें इस बारे में कुछ भी नहीं पता है।

पृष्ठभूमि
ये कहानी महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले और मध्य प्रदेश के अशोक नगर एवं गुना जिलों में चलने वाली एक प्रथा पर आधारित है। इन जिलों में पुरुष और महिलाओं का अनुपात बहुत कम है जिसकी वजह से ब्राइड ट्रैफिकिंग को बढ़ावा मिला है। शादी करने के लिए आदमी को दुल्हन खरीदनी पड़ती है। ये दुल्हन शादीशुदा भी हो सकती है और कुंवारी भी। ज़्यादातर इन लड़कियों का मोलभाव इनके खुद के माँ-बाप या भाई करते हैं। दुल्हन की बोली लगाई जाती है। जिसकी बोली सबसे ऊंची होती है, उसे एक कॉन्ट्रैक्ट पर साइन करवा कर लड़की दे दी जाती है। कॉन्ट्रैक्ट एक साल का रहता है और एक साल बाद लड़की बेचने वाला, लड़की खरीदने वाले से लड़की वापस ले आता है। खरीदने वाले के पास अगर पूरे रुपये न भी हों तो वह कुछ रुपये और एक भैंस देकर भी लड़की खरीद सकता है। लड़की एक साल तक खरीदने वाले के साथ रहती है और इस बीच उस पर गुलामों की तरह अत्याचार किया जाता है.
ये लड़कियां ज़्यादातर महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले से लाई जाती हैं और उन्हें मध्य प्रदेश ले जाकर बेचा जाता है। चंद्रपुर के रामनगर पुलिस स्टेशन के एसएचओ ने तीन लड़कियों को इस गैंग से छुड़वाया था। उन्होंने बताया कि एक लड़की की कीमत 30,000 से 50,000 रुपये तक होती है। एक लड़की की कीमत 75,000 रुपये थी मगर खरीदने वाले के पास केवल 50,000 रुपये थे, इसलिए उसने 50,000 रुपये के अलावा एक भैंस भी दी थी। ये लड़कियां बेचे जाने के बाद किसी से शिकायत नहीं करतीं क्योंकि खरीदने वाला इन्हें पत्नी की तरह रखता है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि खरीदने वाला गुस्से में लड़की को वापस कर देता है या बेचने वाला खरीदार से खुश नहीं होता और लड़की को वापस ले जाता है। दोनों ही स्थितियों में बेचने वाला लड़की को दोबारा बेचकर दोगुना पैसा कमाता है।
खरीद-फरोख्त में लिप्त ये लोग ज़्यादातर पारधी समाज से आते हैं। पारधी एक तरह की जनजाति है जिनका राजा-महाराजाओं के समय में अच्छा मूल्य हुआ करता था। इनका काम आखेट करना था, जिसमें बिना किसी शस्त्र का प्रयोग किए जानवरों का शिकार किया जाता था। शिकारियों और पारधियों में अंतर यह है कि पारधी जाल बिछाकर शिकार करते थे जबकि शिकारी शस्त्रों का प्रयोग करते थे। पारधी शब्द ‘पारध’ से बना है जिसका अर्थ होता है शिकार करने वाला। पारधी कई प्रकार के होते हैं जैसे राज पारधी, बाघरी पारधी, गाये पारधी और हिरन पारधी। एक अद्भुत तथ्य यह भी सुनने में आया है कि पारधी पक्षियों की भाषा समझते थे जो शिकार में उनकी सहायता करते थे।
लड़कियों की खरीद-फरोख्त का यह व्यापार महाराष्ट्र में सूखे के दौरान चरम पर होता है।
SonyLiv:
www.sonyliv.com/watch/crime-patrol-satark-4th-november-2015-pratha
YouTube:
www.youtube.com/watch?v=ZinBHy39tEg
Here is the inside story of the case:
www.crimestories.co.in/2015/11/crime-patrol-brides-on-sale-for-cash.html








