Posted On: Monday, February 26, 2018

Case 09/2018: Haridwar double murder, father-son's de-composed dead bodies found inside their home (24th, 25th Feb, 2018)

2018 का नौवां केस
Case 09/2018

A foul smell is coming from a house. Residents of the area complain it to police and when the police come, finds doors of the house are open. When they enter the house, they find two dead bodies of father and son. They are stabbed to kill near 10 times on their chest and stomach. Police's guess is some known person killed them because there is nothing seems to be missing from the house. They also come to know that from the last few months decease Rajan's wife Shalini is not living with him. Let's reveal the inside story behind the Case 09/2018.

video
Watch the video to know more about the case


कॉलोनी के एक घर के भयंकर दुर्गन्ध आ रही है। आस-पास के लोगों को कुछ शक होता है तो पुलिस को बुलाया जाता है। पुलिस आकर देखती है की घर के दरवाज़े खुले हुए हैं। घर के अंदर घुसने पर पिता और पुत्र की लाशें मिलती हैं। उनको करीब दस बार चाक़ू घोंप कर मारा गया है।

File Photo: Rahul aka Bharat
पुलिस का मानना है की इनको किसी जानने वाले ने मारा है क्यूंकि घर में लूटपाट जैसे कोई निशान नहीं मिले हैं। पुलिस को ये भाई पता चलता है की बेटे राजन की पत्नी शालिनी कुछ महीने से उसके साथ नहीं रह रही थी।

SonyLiv:
Part 1: Stabbed To Death 1
Part 2: Stabbed To Death 2

YouTube:
Part 1: https://www.youtube.com/watch?v=NauXJ4SVAB0
Part 2: https://www.youtube.com/watch?v=61lVZzo5cP0

Here is the inside story of the case:
http://thrill-suspense.blogspot.com/2018/02/crime-patrol-double-murder-of-father.html



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Posted On: Friday, February 23, 2018

Case 80/2017: 55 years old clerk Ashok Gupta brutally killed and looted (Episode 883 on 31 Dec, 2017)


2017 का अस्सीवां केस
Case 80/2017
55-year-old accountant Vaibhav Pawar was found killed in his room inside office premises. That night when the caretaker of the office woke up in midnight, he found a lock of the shutter is opened. Then he observed that all three respective locks are opened. He immediately calls store manager Rahul Purohit and when he comes, he finds Vaibhav Pawar dead in a pool of blood. The place where he is lying, "Rahul" is written on the wall with blood. Police come and first, they take Vaibhav and the caretaker into their custody.
Few employees of the office tell that Vaibhav Pawar was having an affair with another employee Mohini. Mohini is a divorcee and since Vaibhav Powar got injured, she was taking full care of her in the office.

Investigating more police comes to know that there is one more employee of the same name "Vaibhav" is there and his full name is "Rahul Kulkarni" who is absconding since Vaibhav Pawar killed.

inside story
YouTube | Dailymotion

SonyLiv:
Unreliable Employee

Youtube:
https://www.youtube.com/watch?v=hbw2IQCRlDk

Here is the inside story of the case:
https://thrill-suspense.blogspot.com/2018/02/crime-patrol-he-wrote-in-blood-to.html

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Posted On: Sunday, February 18, 2018

Case 8/2018: Conspiracy behind the murder of Vikas Chaudhary (Episode 896/897 on 17/18 Feb, 2018)


2018 का आठवाँ केस
Case 8/2018

(Ep. 896, 897)



Online Episode on SonyLiv:
Part 1: www.sonyliv.com...17-Feb-2018
Part 2: www.sonyliv.com...18-Feb-2018

Online Episode on YouTube (Available in few countries):
Part 1: www.youtube.com/watch?v=oHFvUa36v90
Part 2: www.youtube.com/watch?v=F3G-urlOb0E

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Posted On: Thursday, February 15, 2018

India's Burning Cases: Tehelka Founder "Tarun Tejpal "held in sexual harassment case filed by his colleague (Dial 100 Episode 707 on 6th Feb, 2018)

शर्मनाक
A Shameful Act
The story is based on a Nov 2013 scandal when India's well-known journalist Tarun Tejpal was found accused in a case of sexual harassment. The entire incident came into light when few emails on the same issue between the victim, Tejpal and Tehelka's then managing editor Shoma Chaudhary got leaked into media. Police involvement started into the matter when they heard it from the media.
According to Tejpal's junior journalist she was sexually harassed by him twice during Tehelka's annual fest in Goa's Hyatt Hotel. The first time they both were drunk so she avoided it but next time again Tejpal.


SonyLiv:https://www.sonyliv.com/details/episodes/5727422691001/6-February-2018---Crime-Patrol-Dial-100---A-Shameful-Act-



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Posted On: Wednesday, February 14, 2018

Case 7/2018: 19 year old employed girl Rakhi Bhamaria goes missing while returning from the shop (Episode 894, 895 on 10th, 11th Feb, 2018)


साइकिल
Cycle
A father is looking for his missing daughter who did not return after she left for her shop a day before. He also asks the shop owner who tells him that Mamta Khandekar left the shop near 6pm with her two other colleagues.
After searching for her sometimes, he finds her dead near a nullah. A number of injuries can be seen on her body.

After reporting to police, they also find her cycle 200 meters away from the crime spot. The post-mortem reveals that the victim was brutally gang-raped before she was murdered and at least two people have raped her.

Police’s prime suspect is Mamta's father who did not search for her daughter during the night and came home and slept. Their other suspect was shop owner because Mamta went missing from his shop but after Mamta’s colleagues confirm that let left the shop together in the evening near 6pm, the police are now looking for other possibilities.

3 months pass but police are not able to find any clue.

inside story
YouTube | Dailymotion

SonyLiv:
Part 1: Cycle: Masturi Gangrape and murder
Part 2: Cycle: Masturi Gangrape and murder

YouTube (Available in few countries):
Part 1: https://www.youtube.com/watch?v=QFOeayosZf
Part 2: https://www.youtube.com/watch?v=U-I3Nv5xkd4




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Posted On: Friday, February 9, 2018

India's Burning Cases: Nithari Serial Killings (9th Feb, 2018)

निठारी सीरियल किलिंग्स
Nithari Serial Killings


​2006 से पहले किसी ने शायद ही कभी निठारी गाँव का नाम सुना हो. मैंने भी नहीं सुना था. मगर 2006 ने निठारी में जो कुछ हुआ उसके बाद से निठारी शब्द ही एक सनसनी सी मचा जाता है. निठारी नॉएडा या गौतम बुद्ध नगर का एक छोटा सा गाँव है जो की नॉएडा के सेक्टर 31 से बिलकुल लगा हुआ है. इसी सेक्टर 31 के बंगला नंबर डी-5 में हुए वीभत्स हादसों की वजह से निठारी गाँव को एक अलग ही पहचान मिल गई. एक ऐसी पहचान जो सदियों तक चाह कर भी भुलाई न जा सकेगी. 2006 के हादसे ही निठारी की पहचान नहीं हैं, इससे दस साल पहले भी निठारी का नाम मीडिया में आया था मगर तब मीडिया की पहुच उतनी ज्यादा नहीं थी की हर आदमी तक वो खबर पहुच पाए. दस साल पहले निठारी में नकली शराब के व्यापार ने दर्जन भर लोगों की जाने ली थी. मृतकों के परिजनों को वो हादसे अब भी याद हैं, मगर अब निठारी शब्द ज़हन में आते ही छोटे मासूम बच्चों की चीख पुकार सुने देती है. आँखों के सामने खौफनाक दृश्य चमक उठता है की किस तरह से उन दो दरिंदों ने मासूमो को कुकर्म करने के बाद मौत के घाट उतारा होगा और उनकी कटी फटी लाशों को नाले में बहा दिया होगा.

असली हत्यारा कौन?
निठारी काण्ड का मुख्य आरोपी सुरिंदर कोली घोषित किया गया. तो क्या इन हत्याओं के पीछे उसके मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर का कोई हाथ नहीं था? या उसकी पहुच इतनी ज्यादा थी की वो इन सब आरोपों से बच गया! इस पोस्ट में हमारा मकसद इन्ही तत्यों पर प्रकाश डालने का है की क्या वाकई में मोनिंदर सिंह पंढेर बेक़सूर था. मोनिंदर सिंह चंडीगढ़ के एक रसूक वाले परिवार से सम्बन्ध रखता है. वो पढाई में भी काफी अच्छा था और उसने आई.ए.एस की लिखित परीक्षा भी पास की थी मगर उसके बाद क्या हुआ ये पता नहीं चल पाया. मोनिंदर सिंह करोड़ों की प्रॉपर्टी का मालिक है. वो जेसीबी की कंपनी में बतौर सीनियर ​अधिकारी कार्यरत था जिसके कारण उसे चंडीगढ़ से नॉएडा शिफ्ट होना पड़ा क्यों की उसकी कंपनी नॉएडा में थी. नॉएडा के सेक्टर 31 में उसने ही ये खुनी कोठी, कोठी नंबर-5 खरीदी. सुरिंदर कोली उसके परिवार का चंडीगढ़ से ताल्लुक रखने वाला नौकर था जिसे घर की देखभाल और कामकाज के लिए वो नॉएडा ले आया था. चूंकि मोनिदर सिंह ज़्यादातर काम के सिलसिले में बहार रहता था, मोनिंदर सिंह अकेले घर की देखभाल करता था.मोनिंदर सिंह खाना बनाने में एक्सपर्ट था, खासकर नॉन-वेज बनाने में. मोनिंदर सिंह ने उसको बंगले के ऊपर का एक अकेला कमरा रहने के लिए दे रखा था.
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पायल और अन्य बच्चों का गायब होना
इन ​हत्याओं का सिलसिला डेढ़ साल पहले ही शुरू हो चूका था जो की एक कॉलगर्ल पायल के गायब होने के बाद प्रकाश में आया. कोठी डी-5 निठारी गाँव से लगी हुई थी और एक पानी की टंकी जो की निठारी गाँव में आती थी और इस कोठी के ठीक पीछे थी, उसके पास से बच्चों के गायब होने की खबर से गाँव वालों में पहले से ही सनसनी थी.​ लगातार कुछ बच्चों के गायब होने के बाद से लोग इस टंकी को भूतिया टंकी मानने लगे थे. गाँव वालों ने इन वारदातों की खबर पुलिस को दी थी मगर पुलिस ये गुत्थी सुलझा नहीं पाई. पुलिस को शक था की अगवा किये गए बच्चों की तस्करी की जा रही है और इनको शहर या देश से बाहर भेजा जा रहा होगा. इसके लिए पुलिस ने ज़िपनेट की सहायता से मानव तस्करी पता करने की कोशिश भी करी मगर उनको कोई सफलता नहीं मिली. सफलता मिलती भी कैसे, जिन तत्यों की तलाश पुलिस पूरे देश में कर रही थी, वो सच्चाई तो उसी पानी की टंकी से कुछ कदम दूर कोठी नंबर डी-5 में थी.

कैसे सुलझी गुत्थी?
पुलिस ​के सामने इन घटनाओ के तार तब जुड़ने शुरू हुए जब ​नन्दलाल नाम का एक आदमी निठारी पुलिस थाणे में अपनी 20 साल की बेटी पायल के गायब हो जाने की खबर ले कर आया. नन्दलाल निठारी का निवासी था और उसकी पहली रिपोर्ट के अनुसार उसकी बेटी पायल को कोठी नंबर डी-5 से इंटरव्यू के लिए एक कॉल आया था. उसकी बेटी पायल के इंटरव्यू के लिए जाने के बाद से उसकी कोई खबर उसके पिता को नहीं मिली यहाँ तक की पायल का फ़ोन भी कभी कनेक्ट नहीं हो पाया. नन्दलाल की रिपोर्ट पर पुलिस कोठी नंबर डी-5 में गई जहाँ उस समय केवल घर का नौकर सुरिंदर कोली था. सुरिंदर कोली ने साफ़ साफ़ मना किया की पायल नाम की कोई भी लड़की यहाँ नहीं आई है और जब मालिक ही घर पर नहीं हैं तो इंटरव्यू के लिए कोई क्यों कॉल करेगा.
Aarti, Dipali, Ganga Singh, Gunjan Sharma, Harsh, Kalidas,
Krishnarai, Kumari Binali, Manisha and Rachna
नंदलाल के बार बार प्रेशर डालने पर पुलिस ने पायल के मोबाइल रिकॉर्ड खंगालने शुरू किये जिनकी वजह से आख़िरकार उन्हें ये पता चला की पायल की कोठी डी-5 में अक्सर किसी से बात होती रहती थी. ये बात पुलिस के पल्ले नहीं पड़ रही थी की कोई इंटरव्यू के लिए बार बार क्यों बुलाएगा पायल को. इसी शक के चलते पुलिस ने मोनिंदर सिंह पंढेर को निठारी बुलाया और सच जानने की कोशिश की. मोनिंदर सिंह पंढेर​ ने ये कबूला की वो पायल को जानता है. पायल उसकी रखैल है और वो अक्सर पायल को अपने पास बुलाता है और इसके लिए वो पायल के पिता नन्दलाल को रुपये देता है. पुलिस के सामने तब ये खुलासा हुआ की पायल एक कॉलगर्ल है जो की अपने पिता के इशारों पर काम करती है. अब पुलिस को ये तो समझ आगया था की पायल की गुमशुदगी के पीछे डी-5 का कहीं न कहीं से हाथ तो है ही.

किस तरह यूंपी पुलिस ने उठाया फायदा
इतनी खबर पुलिस के सामने आने के बाद पुलिस के हाथ भी बटेर लग गई थी. चूँकि अभी तक मामला पायल की गुमशुदगी तक ही था सो थाना प्रभारी इसका फायदा उठा रहे थे. मोनिंदर सिंह पंढेर​ का सम्बन्ध कई कॉलगर्ल से था और इस बहाने पुलिस पंढेर​ को ब्लैकमेल करने लगी की अगर बात बहार पहुची तो बहुत बदनामी होगी, कहीं मुह दिखने लायक नहीं रहोगे..... पंढेर​ को भी ये डर सता रहा था की अगर ये सब बात खुलती है तो बदनामी तो सच में बहुत होगी, इसी बात का बहाना लेकर केस को दबाने के लिए पुलिस ने पंढेर​ से काफी रुपये ऐंठती रही. इस रिश्वत का खुलासा केस की सीबीआई रिपोर्ट में भी है. यूपी पुलिस मज़े कर रही थी और वो इस तथ्य से कोसों दूर थी की पायल का हुआ क्या और उन गुमशुदा बच्चों का क्या हुआ.

Part 1


Part 2
Crime Patrol Version of the case

दोबारा केस में आई जान
पायल के गायब हुए मोबाइल की वजह से केस में दोबारा जान आई जब उस मोबाइल का आईएम्ईआई नंबर जो की सर्विलिएंस पर डाला गया था, किसी मोबाइल नंबर पर एक्टिवेट हो गया.​​​​ पुलिस ने जब उस नंबर पर कॉल किया तो पता चला की इस मोबाइल का इस्तेमाल संजीव गुर्जर नाम का एक व्यक्ति कर रहा है. पुलिस ने संजीव को हिरासत में लिया ये सोच कर की पायल का कातिल पकड़ा गया, मगर संजीव ने ये बताया की ये मोबाइल उसे एक ऑटो वाले 'सतलरे' ने दिया है​ जिसके ऑटो में कोई आदमी ये मोबाइल गलती से छोड़ गया था. सतलरे से पूछने पर पता चला की पिछले महीने एक आदमी उसके ऑटो में बैठ कर नॉएडा सेक्टर 26 से निठारी सेक्टर 31 डी-5 तक आया था, उसी से ये मोबाइल ऑटो पर छुट गया था जो की उसने उठा लिया.पुलिस के लिए ये अभी भी एक अनजान गुत्थी थी की वो आदमी कौन था जो निठारी आया था और उसके पास पायल का मोबाइल था. पायल के फ़ोन में यूज़ हुए सिमकार्ड की जाँच करी गई जिसमे ये पाया गया की 1 नवम्बर 2006 से 27 नवम्बर 2006 तक पायल के मोबाइल में एक नंबर 9871XXXXXX का इस्तेमाल किया गया जो की सुरिंदर कोली के नाम से रजिस्टर्ड था. पुलिस के लिए निठारी जैसे घने इलाके में ये ढूंढ पाना बहुत मुश्किल था की ये सुरिंदर कोली है कौन. हुआ भी यही मगर पुलिस की नज़र निठारी के एक लैंडलाइन नंबर पर की गई बातचीत पर टिक गई. कॉल करने पर फ़ोन पंढेर के ड्राईवर ने रिसीव किया. पुलिस को लगा की यही सुरिंदर कोली है मगर उसने बताया की सुरिंदर अपने घर अल्मोड़ा गया है. निठारी का पता पूछने पर उसने बताया कोठी डी-5, सेक्टर 31. पुलिस के पास अब पुख्ता सुबूत थे की पायल इसी कोठी से गायब हुई है. एक तरफ पहले सुरिंदर कोली पायल की गुमशुदगी की बात नकार रहा था और दूसरी तरफ पंढेर​ ये कह रहा था की जब पायल गायब हुई तब वो नॉएडा में था ही नहीं तो वो पायल को कोठी पर क्यों बुलाएगा. मगर पुलिस के अनुसार इतना तो तय था की पायल डी-5 में आने के बाद ही गायब हुई है. चूँकि सुरिंदर शहर से निकल चुका था, पुलिस ने मोनिंदर सिंह को बोला की सुरिंदर तक पहुचने में वो पुलिस की मदद करे.


किसने करी ये सारी हत्याएं?
ज़्यादातर लोगों का मानना है की सुरिंदर और मोनिंदर दोनों मिले हुए थे मगर ऐसा है नहीं. सुरिंदर तक पुलिस को पहुचाने में मुख्य हाथ मोनिंदर सिंह पंढेर का ही था.​ मोनिंदर सिंह​ की मदद से सुरिंदर सिंह हत्थे तो चढ़ गया मगर उसके मुह से एक शब्द नहीं फूट रहा था. वो पायल के बारे में कुछ बता की नहीं रहा था. उससे सच उगलवाने के लिए पुलिस ने बहुत मशक्कत की, थर्ड डिग्री भी डी मगर उसने कुछ नहीं उगला. पुलिस ने मुख्य रूप से मुर्दों से भी उगलवाने वाले दरोगाओं को बुलाया तब जाकर सुरिंदर ने कुछ उगलना शुरू किया.

"​हाँ मैंने ही पायल को मारा था. वो अक्सर मोनिंदर सिंह​ के पास आती थी. उसको मैंने कई बार उत्तेजक हालत में देखा था. वो मुझसे भी खूब बातचीत करती थी. मेरा भी मन था की मै उसके साथ सेक्स करू और इसीलिए मैंने उसे उस दिन कोठी में बुलाया था.​ मैंने उसे 500 रुपये देकर अपने साथ सेक्स करने को बोला मगर वो नहीं मानी. उसके अनुसार ये बहुत छोटी रकम थी. मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था. मैंने उसे चाय पीने के बहाने बैठने को कहा. जब वो बैठ गई तो मैंने उसके पीछे से जाकर उसका गला घोटना शुरू कर दिया. उसने विरोध करना चाह मगर मेरे खौफ के आगे आखिरकार उसने दम तोड़ दिया. उसके मरने के बार मैंने उसके साथ सेक्स किया. वो बहुत बड़ी थी, इसलिए मैंने उसके तीन टुकड़े लिए और कोठी के पोछे फेक दिया और उसका मोबाइल अपने पास रख लिया"

कोठी के पीछे नर कंकालों का मिलना
उसकी रात पुलिस ने पंढेर की कोठी की तलाशी ली जिसके दौरान उन्हें पायल की सैंडल मिली और कुछ मांस के टुकड़े भी मिले.गाँव वालों को इस बात की भनक लग गई थी की इस कोठी में पुलिस किसी चीज की तलाश में जुट चुकी है. हालाँकि पुलिस को ये अंदाज़ा नहीं थे की उनकी पायल की लाश की तलाशी उनको कहीं और लेकर जाएगी, मगर गाँव वालों को लग गया था की अगर कोठी की पीछे लाश हो सकती है तो फिर कुछ और भी हो सकता है.

ये यूपी पुलिस की बहुत बड़ी चूक थी, जिस काम को उन्होंने टाला, वो काम वहां के रेजिडेंट वेलफेयर कमेटी के प्रेसिडेंट आर. सी. मिश्रा ने दो गाँव वालों के साथ मिल कर कर डाला. सुबह इन लोगों ने कोठी के पीछे के नाले की खुदाई करनी शुरू कर डी जिसमें उनको एक अपघटित हाथ मिला जिसके बाद उन्होंने इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी.
अब गाँव वालों ने भी पुलिस पर सीधा आरोप लगा दिया की पुलिस इन अमीर लोगों के साथ मिली हुई है और इनके इशारे पर ही इन्होने कभी भी बच्चों के गायब होने का केस सीरियसली नहीं लिया.

क्यों मारा गया निर्दोष बच्चों को? क्या अंगो का व्यापर था ये!
जब सारा किस्सा सामने आ गया उसके बाद पुलिस का काम था इन वजहों को तलाशना, की सुरिंदर और मोनिंदर ने बच्चों की इतनी नृशंस हत्यायें क्यों करी! उसको क्या मिलता था इससे? क्या ये ऑर्गन ट्रेड का मामला था? क्या ये लोग बच्चों के अंगों का व्यापार करते थे? पंढेर के घर पास एक डॉक्टर नवीन चौधरी रहता था जिसके ऊपर पुलिस को काफी समय से शक था की वो किडनी का व्यापार करता है. 1998 के दौरान उसके यहाँ पुलिस का छापा भी पड़ा था मगर कोर्ट ने डॉक्टर को उसी साल दोषमुक्त कर दिया था. पुलिस के शक की सुई उसके ऊपर भी गई की इन बच्चों के अंगो का व्यापार इसके अस्पताल में होता होगा. पुलिस ने इस अस्पताल में छापा भी मारा था मगर उनको जांच में कुछ मिला नहीं.

दुसरे शहर के केस भी खोले गए
पंढेर चूँकि चंडीगढ़ का निवासी था, पुलिस ने उसके चंडीगढ़ घर पर भी छापा मारा. इस बीच उसके बेटे और बीवी को भी इन्टेरोगेट किया गया तो पता चला की पंढेर और उसकी परिवार में माहोल तनावपूर्ण था मगर बाद में ये झूठ साबित हुआ. एक पुलिस ऑफिसर के अनुसार पंढेर का लुधियाना में भी फार्म हाउस था जहाँ उसके आसपास के इलाके से भी बच्चे गायब हुए थे. निठारी केस खुलने के बाद इस केस को भी खोला गया मगर पुलिस को इन केसेज़ और निठारी केस में कोई सम्बन्ध नहीं दिखाई दिया.


आरोप-प्रत्यारोप और मीडिया में सनसनी'
पुलिस को वेबकैम से कनेक्टेड लैपटॉप भी मिला जिससे ये शक भी पैदा हुआ की ये एक इंटरनेशनल चाइल्ड पोर्नोग्राफी रैकेट भी हो सकता है. पुलिस को कुछ फोटोज मिली जिनमे पंढेर कुछ नग्न बच्चों और विदेशियों के साथ था. ये फोटो पंढेर के पिछले चार विदेश दौरे की थी. ये मना गया की ये फोटोज पंढेर विदेश सप्लाई करता होगा मगर ये तथ्य भी गलत साबित हुआ क्युकी जांच के बाद पता चला की फोटो में जो बच्चे थे, वो पंढेर के पोता/पोती थे और इनका चाइल्ड पोर्नोग्राफी से कोई भी सम्बन्ध नहीं था. लैपटॉप और कैमरा परिवार को वापस दे दिए गया मगर इस दौरान ये पूरा किस्सा मीडिया में बहुत उछाला गया.

दोषियों के ब्रेन मैपिंग, नार्को एनालिसिस एंड पॉलीग्राफ टेस्ट
जनवरी 2007 में इन दोनो के कई सारे मेडिकल टेस्ट्स हुए और पुलिस के अनुसार इन दोनों ने ब्रेन मैपिंग और पॉलीग्राफ टेस्ट्स में पूरी तरह से सहयोग दिया. सुरिंदर कोली ने इन टेस्ट्स में अपने सारी गुनाह कबूल किये. उसने बताया की एक बच्चे को मारने और दुष्कर्म करने के बाद उसने उसके गुर्दे को निकल के खाया तो उसे बहुत अच्छा लगा. इसके बाद इसने और भी बच्चों के साथ ऐसा किया. उसने ये भी स्वीकार की वो बच्चों के मांस को फ्रिज में भी रखता था. मगर पूरे टेस्ट के दौरान उसने ये भी कहा की वो जो कुछ भी करता था उसका पता पंढेर को नहीं था. उसने ये माना की उसने सारी हत्यांएं गला घोट कर की. हत्या करने के बाद वो लाश के साथ दुष्कर्म करता था फिर अपने बाथरूम में ले जाकर वो लाश के टुकड़े करता था और कोठी के पीछे नाले में फेक देता था. वो अपने मालिक को लड़कियों के साथ अइयाशी करते देख कर उत्तेजित हो जाता था. उसके पास वेश्या बुलाने के इतने पैसे तो होते नहीं थे, सो वो बच्चों को किडनैप कर के उनसे वो कमी पूरी करता था. उसका मुख्य निशाना बच्चियां होती थी मगर कभी अगर वो किसी लड़के को ले आता था तो पता लगने के बाद की वो लड़का है, वो उसकी तुरंत नृशंस हत्या करता था.

कोली के कुकर्मो में एक पायल ही थी जो की बालिग़ थी. बाकियों बच्चों की उम्र 10 साल या उससे कम थी जिनमे से ज़्यादातर लड़कियां थी. पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट्स में बताया गया की 17 कंकालों में से 11 लड़कियों के थे. नॉएडा के एक सरकारी अस्पताल के मुताबिक कोली ने एक कसी की तरह से हत्यायों को अंजाम दिया था और उसको लाशों को काटने का एक अलग ही तरीका था. एम्स दिल्ली के अनुसार कुल 19 कंकाल पाए गए थे जिनमे से सोलह पूर्ण थे और तीन अर्ध्पूर्ण.


मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरिंदर कोली दोषी करार
12 फरवरी, 2009 को गाज़ियाबाद के स्पेशल सेशन कोर्ट ने मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरिंदर कोली को चौदह साल की रिम्पा हालदार के हत्या (8 फरवरी 2005) के जुर्म के दोषी करार दिया जबकि सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में पंढेर को बेक़सूर बताया था.
13 फरवरी, 2009 को कोर्ट ने केस को “रेयरेस्ट ऑफ़ दि रेयर” की श्रेणी में डालकर दोनों दोषियों को मृत्युदंड दिया.
4 मई 2010 को कोर्ट ने कोली को सात वर्षीय आरती प्रसाद की हत्या (25 अक्तूबर, 2006) के जुर्म में दोबारा मृत्युदंड दिया.
27 सितंबर, 2010 को कोर्ट ने कोली को नौ वर्षीया रचना लाल की हत्या (10 अप्रैल 2006) के जुर्म में तीसरा मृत्युदंड दिया.
22 दिसंबर, 2010 को कोर्ट ने कोली को बारह वर्षीय दीपाली सर्कार की हत्या (जून 2006) के जुर्म में चौथा मृत्युदंड दिया.
15 फरवरी, 2011 को कोर्ट ने सभी आरोपों को सही ठहराया.
24 दिसंबर 2012 को कोर्ट ने कोली को पांच वर्षीय छोटी कविता की हत्या (4 जून, 2005) के जुर्म में पांचवा मृत्युदंड दिया.
फरवरी 2011 में कोर्ट ने एक बार फिर सभी आरोपों को सही ठहराते हुए कोली की मृत्युदंड की सजा को बरकरार रखा.

सुरिंदर कोली को मृत्युदंड
जुलाई 2014 में राष्ट्रपति प्रणब मुख़र्जी ने सुरिंदर कोली की दया याचिका को ख़ारिज कर दिया.
3 सितम्बर 2014 को कोर्ट ने कोली का डेथ वारंट जारी किया और शाम को कोली को गाज़ियाबाद की डासना जेल से शिफ्ट कर के मेरठ जेल भेज दिया गया क्युकी डासना जेल में फांसी पर लटकाने के उचित इन्तजाम नहीं थे.
कोर्ट ने सुरिंदर कोली को 12 सितम्बर को मृत्युदंड देने की घोषणा की मगर कुछ कारणों से इसको 29 अक्टूबर, 2014 को शिफ्ट कर दिया गया.


मोनिंदर सिंह पंढेर का मृत्युदंड माफ़
10 सितम्बर, 2009 को कोर्ट ने मोनिंदर सिंह पंढेर का मृत्युदंड माफ़ कर दिया. चूँकि वो मुख्य आरोपी नहीं था मगर उसको सह आरोपी मन गया. पंढेर का ट्रायल अभी चल रहा है और उसकी मृत्युदंड की सजा को बरक़रार रखा जा सकता है अगर वो किसी भी केस में फिर से आरोपी साबित हुआ. कोर्ट ने पंढेर को उसी दिन रिहा किया जिस दिन कोली को मृत्युदंड की सजा सुनाइ गई.

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Posted On: Tuesday, February 6, 2018

Case 6/2018: 'Psycho killer' Buddhadeb Behera held in the murders of 6 women (Episode 892, 893 on 3, 4 February 2018)


आसक्त
Obsessed

Maharashtra police encounter a case of a serial killer. An unidentified man whose modus-operandi is weird. The last year 2017 they find a female dead body on Nashik outskirts area. The deceased is unknown to everyone which is a blind murder case for police for now. Police also find some identification documents in the woman's purse and these documents belong to a man. Police's first suspect could be this man but they also think that why a murdered will leave his identification documents on the crime spot!!
A journalist who is covering the incident tells police that she encountered with a similar case in 2014 in Madgoan - Goa. In that case, also the woman was killed in the same manner and that crime spot also had similar documents that were belonging to an unknown person but when police tracked that person and asked her about this murder, he told police that he never been in Madgaon and the documents police found were stolen from him sometime back when he was traveling in a train.

On the other hand, Serial Killer is about to join a construction site in Pune as a labor contractor. He introduced himself as Jagdish Mane and tells that he came from Mumbai. He dislikes Mumbai because of pollution, noise and traffic, etc.

inside story
YouTube | Dailymotion

Police take a psycho specialist Rachna's help in tracking the culprit. She suggests police that this person is obsessed with sex and his motive behind all these murders is only sex. She also suggests police that between 2014 to 2017 he must have committed a few more similar murders. She gives some tips to police about his behavior and police activates their informers for this.

Informers start looking for similar personality in the red light area and finally finds a clue about a man who has similar behavior. On the other hand, Dr. Rachna also tracks some records and comes up with a photograph of a man. This man is Kamlesh who went missing 2 days after his sister-in-law went missing. Kamlesh is married to Pallavi who fell in love with him in a construction site and later they got married.

Now when police ask their informer to go and match Kamlesh's photo with that person, that sex worker identified him.

SonyLiv:
Part 2: Obsessive Part-1
Part 2: Obsessive Part-2

YouTube (Available in a few countries:
Part 2: https://www.youtube.com/watch?v=fU7Nortn20U
Part 2: https://www.youtube.com/watch?v=81f6jCUJF0E



Here is the inside story of the case:
http://thrill-suspense.blogspot.com/2018/02/crime-patrol-delanga-womans-murder.html


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Posted On: Monday, February 5, 2018

India's Burning Cases: Jessica Lal Murder Case (Dial 100 5th, 6th Feb, 2018)






Death is a truth but when it comes before time, it creates chaos in the society. Model Jessica Lal was shot dead during the mid night of 29th April 1999. Reason! She denied serving liquor to a man. Who killed her! That was Manu Sharma, son of then Congress MP from Haryana "Vinod Sharma" who was the main reason behind delayed justice of the case. It took nine-year, a series of trials and the court acquitted Manu Sharma on Feb 2006.
Jessica Lal
30th April 1999: Doctors of Apollo Hospital told police that Jessica was dead when she was brought to the hospital

2nd May 1999: Manu Sharma's Tata Safari was found from Noida, UP

6th May 1999: Manu Sharma surrendered before Chandighar court. UP's politician's son Vikas Yadav and the other 10 suspects also arrested.

3rd Aug 1999: Chargesheet filed against all accused under multiple sections of IPC

31 Jan, 2000: Magistrate court handedover the case to session court for further proceedings.

23rd Nov 2000: The Session court imposed charges on nine people. 10th accused Amit Jhingan was acquitted while Ravinder aka Titu was declared as fugitive.

2nd May 2001: Court asked victim side to represent evidence. Eyewitness Deepak Bhojwani gave his statement before the court.

3rd May 2001: Eyewitness Sham Munshi denied to identify Manu even he was present there at the time of the murder. He also said that he does not know Hindi and can't speak in Hindi.

3rd Mat 2001: Electrician and eyewitness Shiv Das also changed their statements.

6th July 2001: Malini Ramani, daughter of Beena Ramani identified Manu Sharma.

16th May 2001: Third main witness also changed his statement.

12th Oct, 2001: Restaurant and bar owner Been Ramani identified Manu Sharma:

17th Oct 2001: Beena's canadian husband George Mehlor registered his statement and identified Manu.

20th July 2004: Enquiry officer Surinder Sharma registered his statement.

"No-one Killed Jessica"
21st Feb, 2001: In lack of evidence, lower court acquitted all nine suspect.

20th Dec 2006: High court gave life imprisonment to Manu Sharma also fined him with 50,000 rupees. Amardeep Singh Gil and Vikas Yadav also sent to jail for four years with a fine of 3000 each.

13th March, 2006: Delhi police went to high court against the order.

3rd Oct, 2006: Jessica Lal's case was put on fast-track

18th Dec 2006: Manu Sharma, Vikas Yadav and Amardeep Gil aka Tony were found guilty by the high court while Alok Khanna, Vikas Gil, Harvinder Singh Chopra, Raja Chopra, Shyamsundar Sharma and Yograj Singh were acquitted.

A massive protest was going on over the Capital of India. People were protesting on India Gate.

2nd Feb, 2007: Manu Sharma filed appeal on Supreme Court

8th March 2007: Supreme court accepted Manu Sharma's appeal.

27th Nov, 2007: Supreme court rejected Manu's appeal for bail.

12 may, 2008: Supreme court again rejected Manu's appeal for bail.



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